अशोक गहलोत जीवनी, Ashok Gehlot Biography: अशोक गहलोत एक वरिष्ठ भारतीय राजनेता और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (INC) के प्रमुख नेता हैं, जिन्होंने राजस्थान के मुख्यमंत्री के रूप में तीन कार्यकाल पूरे किए हैं। सरल स्वभाव, कुशल प्रशासनिक क्षमता और गांधीवादी विचारधारा के प्रति उनकी निष्ठा के कारण वे भारत के सबसे अनुभवी और सम्मानित नेताओं में गिने जाते हैं। अपनी राजनीतिक सूझ-बूझ और प्रतिद्वंद्वियों को मात देने की क्षमता के कारण उन्हें “राजस्थान का जादूगर” कहा जाता है।
🧑🎓 प्रारंभिक जीवन और शिक्षा
- पूरा नाम: अशोक गहलोत
- जन्म तिथि: 3 मई 1951
- जन्म स्थान: जोधपुर, राजस्थान
- परिवार: इनके पिता लक्ष्मण सिंह गहलोत एक घूम-घूमकर जादू दिखाने वाले कलाकार और नगर पालिका अध्यक्ष थे।
- पत्नी: सुनीता गहलोत
- संतान: पुत्र वैभव गहलोत (राजनेता) और एक पुत्री
- शिक्षा:
- विज्ञान स्नातक (B.Sc.)
- विधि स्नातक (LLB)
- अर्थशास्त्र में स्नातकोत्तर (M.A.)
- प्रेरणा स्रोत: महात्मा गांधी के आदर्शों से प्रभावित होकर उन्होंने युवावस्था से ही छात्र राजनीति और समाज सेवा में सक्रिय भाग लिया।
1971 में भारत-पाक युद्ध के दौरान शरणार्थी शिविरों में कार्य करते समय, उनकी संगठनात्मक क्षमता ने तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी को प्रभावित किया, जिसके बाद उनकी राजनीतिक यात्रा की शुरुआत हुई।
🏛️ राजनीतिक करियर
अशोक गहलोत का राजनीतिक जीवन चार दशकों से अधिक का है और उन्होंने राज्य तथा केंद्र दोनों स्तरों पर कई महत्वपूर्ण पद संभाले हैं।
🔹 युवा नेतृत्व और आरंभिक राजनीति
- राजस्थान में नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया (NSUI) के पहले राज्य अध्यक्ष बने।
- 1970 के दशक में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस से जुड़कर राष्ट्रीय राजनीति में सक्रिय हुए।
🔹 सांसद (लोकसभा)
- जोधपुर लोकसभा सीट से पाँच बार सांसद चुने गए — 1980, 1984, 1991, 1996 और 1998 में।
- उन्होंने प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी, राजीव गांधी, और पी.वी. नरसिम्हा राव की सरकारों में मंत्री पद संभाला।
- उन्होंने पर्यटन, नागरिक उड्डयन, खेल और बाद में वस्त्र मंत्रालय (स्वतंत्र प्रभार) जैसी जिम्मेदारियाँ निभाईं।
🔹 राजस्थान कांग्रेस नेतृत्व
- कई बार राजस्थान प्रदेश कांग्रेस कमेटी (RPCC) के अध्यक्ष रहे।
- पार्टी में एकजुटता बनाए रखने और संगठन को मजबूत करने में उनकी भूमिका महत्वपूर्ण रही।
👑 राजस्थान के मुख्यमंत्री के रूप में कार्यकाल
अशोक गहलोत ने तीन बार राजस्थान के मुख्यमंत्री के रूप में कार्य किया:
- पहला कार्यकाल (1998–2003):
- गंभीर सूखे की स्थिति में राहत कार्यों का सफल प्रबंधन किया।
- सामाजिक कल्याण और ग्रामीण विकास पर विशेष ध्यान दिया।
- दूसरा कार्यकाल (2008–2013):
- मुफ़्त दवा योजना (Free Medicine Scheme) शुरू की, जिससे सरकारी अस्पतालों में निःशुल्क दवाइयाँ उपलब्ध कराई गईं।
- शिक्षा, स्वास्थ्य और महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा दिया।
- तीसरा कार्यकाल (2018–2023):
- चिरंजीवी स्वास्थ्य बीमा योजना, बुजुर्ग पेंशन योजना, और रोज़गार सृजन जैसे कार्यक्रम लागू किए।
- इस दौरान पार्टी के भीतर सचिन पायलट के साथ राजनीतिक टकराव भी देखने को मिला।
⚖️ चुनौतियाँ और विवाद
- नेतृत्व संघर्ष: सचिन पायलट के साथ लंबे समय से चली आ रही खींचतान ने कांग्रेस सरकार में अस्थिरता पैदा की।
- संजीवनी क्रेडिट कोऑपरेटिव सोसाइटी घोटाला: गहलोत ने केंद्रीय मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत पर घोटाले में शामिल होने का आरोप लगाया, जिससे कानूनी विवाद हुआ।
- 2023 विधानसभा चुनाव: कांग्रेस की हार के लिए गहलोत के कई निर्णयों, विशेषकर मौजूदा विधायकों को फिर से टिकट देने, को जिम्मेदार माना गया।
📈 वर्तमान स्थिति और विरासत
2023 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की हार के बाद अशोक गहलोत ने तीसरा कार्यकाल पूरा किया और वर्तमान में वे सरदारपुरा विधानसभा क्षेत्र से विधायक हैं।
वे अब भी कांग्रेस के वरिष्ठतम नेताओं में से एक हैं और अपने गांधीवादी मूल्यों, शांत स्वभाव और कुशल प्रशासन के लिए व्यापक रूप से सम्मानित किए जाते हैं।
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